ममता का मार्गदर्शन एवं नव-दंपत्ति प्रशिक्षण कार्यशाला
दिनांक 8 मई, 2026 को राष्ट्रोत्थान गुरुकुलम, बांगरमऊ, उन्नाव में समाज और परिवार को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से “ममता का मार्गदर्शन” एवं “नव दंपत्ति प्रशिक्षण” विषय पर एक कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में सामाजिक कार्यकर्ता श्रीमती ज्योति पाण्डेय तथा गुरुकुल के संचालक आचार्य योगेश विशेष रूप से उपस्थित रहे।
कार्यशाला के प्रथम सत्र “ममता का मार्गदर्शन” में नवगठित परिवारों की सासों को यह बताया गया कि बहू के प्रति कैसा व्यवहार, संवेदनशीलता और आचरण अपनाया जाए, जिससे परिवार में प्रेम, सहयोग और आपसी सामंजस्य बना रहे। श्रीमती ज्योति पाण्डेय ने विषय के सामाजिक एवं कानूनी पक्षों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि परिवार में सम्मानपूर्ण व्यवहार, संवाद और समझदारी न केवल रिश्तों को मजबूत बनाते हैं, बल्कि अनेक सामाजिक और कानूनी विवादों को भी रोक सकते हैं। वहीं आचार्य योगेश ने परिवार व्यवस्था के धार्मिक एवं आध्यात्मिक पक्ष को रखते हुए कहा कि भारतीय परंपरा में परिवार केवल साथ रहने की व्यवस्था नहीं, बल्कि संस्कार, कर्तव्य और आत्मीयता का केंद्र है।
इसके बाद “नव दंपत्ति प्रशिक्षण” सत्र में नवविवाहित जोड़ों तथा निकट भविष्य में विवाह करने वाले युवक-युवतियों को दांपत्य जीवन के सामाजिक, सांस्कृतिक, धार्मिक और व्यवहारिक पक्षों की जानकारी दी गई। प्रशिक्षण के दौरान वैवाहिक जीवन में पारस्परिक सम्मान, जिम्मेदारी, संवाद और भारतीय पारिवारिक मूल्यों के महत्व पर विस्तार से चर्चा हुई। श्रीमती ज्योति पाण्डेय ने दांपत्य जीवन में अधिकारों, कर्तव्यों और सामाजिक संतुलन की आवश्यकता को समझाया, जबकि आचार्य योगेश ने विवाह को केवल सामाजिक बंधन नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक और संस्कारमय दायित्व बताते हुए परिवार निर्माण में धैर्य, त्याग और सहयोग के महत्व पर बल दिया।
कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने इस कार्यशाला को अत्यंत उपयोगी बताते हुए कहा कि इस प्रकार का मार्गदर्शन परिवार और समाज दोनों को नई दिशा दे सकता है तथा आपसी संबंधों में सकारात्मक परिवर्तन ला सकता है।
कार्यशाला के प्रथम सत्र “ममता का मार्गदर्शन” में नवगठित परिवारों की सासों को यह बताया गया कि बहू के प्रति कैसा व्यवहार, संवेदनशीलता और आचरण अपनाया जाए, जिससे परिवार में प्रेम, सहयोग और आपसी सामंजस्य बना रहे। श्रीमती ज्योति पाण्डेय ने विषय के सामाजिक एवं कानूनी पक्षों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि परिवार में सम्मानपूर्ण व्यवहार, संवाद और समझदारी न केवल रिश्तों को मजबूत बनाते हैं, बल्कि अनेक सामाजिक और कानूनी विवादों को भी रोक सकते हैं। वहीं आचार्य योगेश ने परिवार व्यवस्था के धार्मिक एवं आध्यात्मिक पक्ष को रखते हुए कहा कि भारतीय परंपरा में परिवार केवल साथ रहने की व्यवस्था नहीं, बल्कि संस्कार, कर्तव्य और आत्मीयता का केंद्र है।
इसके बाद “नव दंपत्ति प्रशिक्षण” सत्र में नवविवाहित जोड़ों तथा निकट भविष्य में विवाह करने वाले युवक-युवतियों को दांपत्य जीवन के सामाजिक, सांस्कृतिक, धार्मिक और व्यवहारिक पक्षों की जानकारी दी गई। प्रशिक्षण के दौरान वैवाहिक जीवन में पारस्परिक सम्मान, जिम्मेदारी, संवाद और भारतीय पारिवारिक मूल्यों के महत्व पर विस्तार से चर्चा हुई। श्रीमती ज्योति पाण्डेय ने दांपत्य जीवन में अधिकारों, कर्तव्यों और सामाजिक संतुलन की आवश्यकता को समझाया, जबकि आचार्य योगेश ने विवाह को केवल सामाजिक बंधन नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक और संस्कारमय दायित्व बताते हुए परिवार निर्माण में धैर्य, त्याग और सहयोग के महत्व पर बल दिया।
कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने इस कार्यशाला को अत्यंत उपयोगी बताते हुए कहा कि इस प्रकार का मार्गदर्शन परिवार और समाज दोनों को नई दिशा दे सकता है तथा आपसी संबंधों में सकारात्मक परिवर्तन ला सकता है।
Project Info
Category:
News & Media
Programs:
नव-दंपत्ति प्रशिक्षण कार्यशाला
Location:
राष्ट्रोत्थान गुरुकुलम, बांगरमऊ, उन्नाव
Date:
09 May 2026
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